
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
नामी यूनिवर्सिटियों के नाम पर फर्जी डिग्री, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनाकर लाखों में बेचने वाले रैकेट के मास्टरमाइंड की खुद की LLB की डिग्री भी फर्जी निकली। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
आरोपी परिमल गौरकर (32) ने इसी फर्जी डिग्री के आधार पर बार काउंसिल से सनद लेकर नागपुर हाईकोर्ट में वकालत भी शुरू कर दी थी। दुर्गापूर पुलिस ने शुक्रवार सुबह नागपुर के कोराडी स्थित एक होटल से परिमल गौरकर और उसके साथी अक्षय खोब्रागडे (30) को गिरफ्तार किया। इससे पहले पुलिस ने उसके रिश्तेदार और एजेंट वैभव सोनुले को गिरफ्तार किया था।
शिकायत के बाद खुला राज
चंद्रपुर के वैभव माशीरकर ने दुर्गापूर थाने में शिकायत की थी कि परिमल फर्जी डिग्री और सर्टिफिकेट बनाकर बेच रहा है। पुलिस निरीक्षक संतोष शेगावकर और उपनिरीक्षक रवींद्र नक्कनवार ने जांच शुरू की। वैभव सोनुले से पूछताछ के बाद पुलिस नागपुर पहुंची और दोनों आरोपियों को पकड़ा।
पुलिस के मुताबिक, वैभव जैसे एजेंट ग्राहक ढूंढकर परिमल के पास लाते थे। जरूरत के हिसाब से फर्जी डिग्री, मार्कशीट या माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार कर दिया जाता था। इनकी कीमत 5 से 10 लाख रुपये तक वसूली जाती थी। इनका इस्तेमाल आगे की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि सरकारी नौकरी पाने और प्रमोशन के लिए भी किया जा रहा था।
खुद की डिग्री भी फर्जी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परिमल खुद LLB का छात्र था। लगातार 4 साल फेल होने के बाद उसने अपनी ही LLB की फर्जी डिग्री और मार्कशीट बना ली। फिर उसी के दम पर बार काउंसिल की सनद लेकर वकालत करने लगा। पुलिस अब संबंधित यूनिवर्सिटी और बार काउंसिल से दस्तावेजों का वेरिफिकेशन करा रही है।
पुलिस का आरोप है कि परिमल ने राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर यूनिवर्सिटी, संत गाडगे बाबा अमरावती यूनिवर्सिटी, गोंडवाना यूनिवर्सिटी के अलावा कोल्हापुर, सोलापुर, राजस्थान और कर्नाटक की कई यूनिवर्सिटियों के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाए हैं।
पुलिस अब पता लगा रही है कि ये दस्तावेज कैसे और किस तकनीक से बनाए जाते थे और इस रैकेट में और कितने लोग शामिल हैं। फर्जी दस्तावेजों से नौकरी और प्रमोशन लेने वालों की भी तलाश शुरू की गई है।








